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शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

कयामत कुछ 'घड़ी' करीब आ गई है

डरिये, कि कमायमत की घड़ी कुछ और पल करीब आ गई है। अब आधा मिनट पहले प्रलय होगा होगा और दुनिया खत्म! मामला घबराने से ज्यादा सोचने वाला है। समय पर चलने वाली घड़ी, घड़ी-घड़ी कम होती जा रही है? कयामत की जो रात 12 बजे के लिए तय है वो कुछ घड़ी पहले हो जाएगी। पक्का पहली नजर में यह मानने वाली बात नहीं लगती लेकिन होना ऐसा ही है। प्रतीकात्मक ही सही खतरा सिर पर खड़ा है। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स से जुड़े वैज्ञानिकों ने गुरुवार को प्रतीकात्मक डूम्सडे क्लॉक (कयामत के दिन की घड़ी) में प्रलय का सयम 30 सेकंड पहले कर दिया। ऐसा अनायास नहीं हुआ। दुनिया के चौधरी के बयान और वैश्विक उथल-उथल के बीच भविष्य को लेकर आशंकित दुनिया के 15 नोबेल विजेताओं सहित कई कई बुद्धिजीवियों और वैज्ञानिकों ने नए अमेरिकी निजाम के परमाणु आयुध संबंधी योजनओं, अतिरेकी राष्ट्रवाद के उदय और पर्यावरण परिवर्तन संबंधी इरादे जाहिर होने के बाद कयामत को और करीब मान लिया है।

1947 में नागासाकी और हिरोशिमा में परमाणविक प्रलय के बाद शुरू हुए इस अकादमिक जर्नल बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने बीते 70 सालों में जब भी खतरा महसूस किया कमायमत का समय करीब ला दिया। घड़ी का समय तब-तब घटाया गया जब-जब लगा कि पर्यावरण, इंसान या पूरी दुनिया किसी न किसी कारण खतरे में है। शीत संघर्ष की शुरुआत रही हो या खाड़ी के युद्ध का समय, चेताया गया कि मानवता खत्म होने के करीब है। भले घड़ी यह न बता पाए कि वो घड़ी कब आने वाली है लेकिन जिस तरह समय घट रहा है यह तय है कि नए तरीके का विध्वंश नजदीक आ रहा है।

11 मार्च होते-होते हम अपने देश का होगा
बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स इस बार प्रलय का समय सिर्फ नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के कारण करीब ला दिया। ठीक भी तो है ऐसे बयान संकेत ही तो हैं, मस्तिष्क में चल रही कुटिलताओं के। सोचिए जरा अगर ऐसी ही कोई घड़ी अपने देश के लिए भी बने और सिर्फ नेताओं के बयानों से चले तो क्या हो? प्रशंसा-आलोचना, समर्थन-विरोध, वादे-जुमले, दावे-वादे, आरोप-प्रत्यारोप से दूर चुनाव गोली-गाली, दल-बदल, झूठ-फरेब, मनी-मसल्स तक पहुंच गए हैं। यूपी सहित पांच राज्यों के चुनाव में अगर नेताओं के बयानों की स्पीड से घड़ी का समय घटने लगे तो 11 मार्च होते-होते हम अपने देश का होगा? सिर्फ सोचना है, करना कुछ नहीं।।

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