राज और समाज पर खरी आवाज

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गुरुवार, 19 मार्च 2015

मिसकॉल

हर सुबह खनकती आवाज में जगाना, दिनभर अपने होने का एहसास कराना, जब भी याद करूं हवा के झोंके सा छूू जाना, रूठना, मनाना, फिर मनाकर खुद रूठ जाना।। सैकड़ों मील दूर से मेरी धड़कन सुनना, समझना, वैसे ही...जैसे साथ होने पर सुनती-समझती थी, वैसे ही पूछना, बताना, किसी बात पर खुलकर हंसना ...और किसी बात पर वैसे ही आंख दिखाना, सब जानने के बावजूद मुझपर अपना हक जताना।। इतना...इतना और इतना ज्यादा प्यार तुम्हीं कर सकती हो, तुम्हीं कर सकती हो, इतनी दूर होने पर भी, इतनी दूर होकर भी... सिर्फ एक मिसकॉल से।। (From my diary)

किस शहर से आए हैं

कहां - कहां से

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