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गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

महाराष्ट्र की महाभारत का यथार्थ-निहितार्थ-स्वार्थ

इस समय देश के सभी बड़े-छोटे, पतले-मोटे, खरे-खोटे चैनलों पर एक ही खबर चल रही है। अरे वही खबर अपने महाराष्ट्र की महाभारत। हर मिनट नई बे्रकिंग न्यूज फ्लैश होती है, कि ठाकरे से सोनिया को यह कहा, कांग्रेस ने यह जवाब दिया। बॉलीवुड भी कूदा मैदान में, शिवसेना के गुंडों ने फलानी जगह पर उत्पात मचाया, फलां सिनेमाघर में तोडफ़ोड़ की.... आदि-आदि। मुंबई में छिड़ी महाभारत देशव्यापी होती जा रही है। कुछ सिरफिरे लोगों की सनक का खामियाजा देश को भुगतना पड़ रहा है। एक क्षुब्ध मानसिकता को लेकर राजनीति करने वाला दल और दल के लोग अपने मुखपत्र में कुछ भी लिखते हैं उसे हमारे जिम्मेदार लोग घंटों दिखाते हैं। फिर होता है पलटवार और यह क्रम निरंतर चलता है। यह सबसे बड़ी खबर है। मैं इस सवाल पर नहीं जाना चाह रहा कि शाहरुख ने क्या कहा और न ही इस पचड़े में फसूंगा कि ठाकरे एंड सन्स क्या उगल रहे हैं। मेरा वास्ता इस बात से भी नहीं कि भाजपा-शिवसेना-संघ किस मसले पर मुंहभंजन कर रहा है। मेरे सवाल मीडिया और सरकार से हैं।

जिम्मेदारों की जिम्मेदारी
जहां आग न लग रही हो वहां कुछ जिम्मेदार लोग आग लगा सकते हैं और जहां सचमुच आग लगी हो उसकी आंच तक बाहर नहीं दिखने देंगे। पहले तो शाहरुख के मुंह से पाक खिलाडिय़ों के पक्ष में बुलवाया फिर उसे बे्रकिंग न्यूज बना कर चलाया। चलाया तो चलाया उस पर शिवसेना की प्रतिक्रिया मांगी। अब अपना जनाधार खोकर पांच साल के लिए खाली बैठी और जमीन तलाश रही शिवसेना को तो बैठे बैठाए मुद्द मिल गया। खोल दिया मोर्चा। मैं शाहरुख के विचार व्यक्त करने की आजादी का समर्थन करता हूं। लेकिन जिम्मेदार लोग यहीं नहीं बैठने वाले थे। सामना रोज क्या लिख रहा है वह तो महाराष्ट्र में ही रहता है फिर उसे प्राइम टाइम की लीड क्यों बनाया जाता है? राजनीति के नाम पर गुंडई कभी बर्दाश्त नहीं की जा सकती, यह जानने के बावजूद क्या जरूरत है शिवसेना के नेताओं को घंटों डिबेट में शामिल करने का और बार-बार उनसे बयान लेने का? दरअसल इसके पीछे यथार्थ-निहितार्थ-स्वार्थ कुछ और भी है।

इतिहास से न सीखने वाले को समय कभी माफ नहीं करता
आखिर सामना में रोज लिखकर धमकी दी जा रही है। दिन दहाड़े तोडफ़ोड़ प्रदर्शन हो रहा है तो क्यों नहीं सरकार कोई कार्रवाई करती। महाराष्ट्र और केंद्र सरकार आखिर दर्शकों जैसे व्यवहार क्यों कर रही है? पहले इसी कांग्रेस सरकार ने राज ठाकरे को पाला-पोसा बड़ा किया। यह शाश्वत सत्य है कि जो इतिहास से नहीं सीखते इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करता। आजादी के समय भारत-पाक बंटवारे के फैसले को छोड़ भी दें तो उसके बाद नोआखली से लेकर गुजरात और कंधमाल दंगों तक सरकार गलतियां करती आई है। ज्यादा पुरानी बातें छोड़ भी दें तो अगर 1984 के दंगाईयों को सख्त सजा हुई होती तो कोई धर्र्मांध कभी गुजरात में तलवार लहराने की जुर्रत न करता। भारतीय लोकतंत्र पर आपातकाल का सबसे बड़ा कलंक लगाने वालों को सजा हुई होती तो कोई भी जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद या विधायक अपने पद और शक्ति का दुरुपयोग करने की जुर्रत न करता। भिंडरावाले को पैदा किया, पाला-पोसा फिर उसकी देश को क्या कीमत चुकानी पड़ी इतिहास गवाह है। बड़ा पेड़ गिरने पर आस-पास की जमीन कांपी तो उससे बना जख्म आज तक देश को साल रहा है। वही गलती महाराष्ट्र सरकार ने राज ठाकरे को शह देकर की। अब फिर वही दोहराया जा रहा है। जब साफ-साफ दिख रहा है कि कानून तोड़ा जा रहा है तो उन लोगों को बंद करो जेल में। देश में कानून का राज है कि नहीं? कम से कम महाराष्ट्र में तो यह नहीं दिख रहा। कम से कम अब तो सरकार कार्रवाई करे।

अपना गणित यह कहता है
- महंगाई आसमान छू रही है। इतने से आम आदमी की सरकार को सुकून नहीं हुआ तो अब पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और केरोसिन का दाम बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। जनता महंगाई को भूल जाए इसलिए जिम्मेदारा लोगों द्वारा प्रायोजित महाराष्ट्र का महाभारत अनवरत जारी है।
- बिहार विधानसभा चुनाव हैं। झारखंड में मिली मायूसी और नीतीश कुमार के विकास कार्र्यों को देखें तो नहीं लगता कि कांग्रेस या लालू-पासवान बिहार में सरकार बना पाएंगे, लेकिन जिम्मेदार लोग बिहार के विकास का स्क्रोल तक नहीं चलाते और राहुल बाबा की यात्रा को सफल बताते हैं।
- सरकार ने एक पूर्व (सेवा निवृत्त) आतंकी को पद्मश्री दे दिया है। बताया गया है कि उन महानुभाव ने हथियार छोड़कर समाजसेवा शुरू कर दी है। पर जिम्मेदार लोगों को यह खबर नहीं दिखी। (अब मुझे इंतजार है कब अफजल गुरु, कसाब और अबू सलेम को पद्मश्री मिलेगा।)
- सरकार के मंत्री प्रधानमंत्री के खिलाफ बोल रहे हैं। सहयोगी पार्टियों के नेता राज्यसभा से प्रधानमंत्री बनने को गलत ठहरा रहे हैं। सरकार बचाने के लिए एक ही राज्य में चार मुख्यमंत्री बनाए जा रहे हैं पर जिम्मेदार लोग नहीं चाहते कि देश इसे भी जाने। देश तो बस यह जाने की राहुल बाबा जहां जाते हैं वहां लड़कियां उनकी दीवानी हुई जा रही हैं। लोग उन्हें देखने के लिए बेताब हो जा रहे हैं, आदि, आदि....
- राहुल बाबा पूरे देश में घूमकर पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को बढ़ावा देने का वादा कर रहे हैं। और रात में एक विधायक को पार्टी की यूथ विंग का राष्टï्रीय अध्यक्ष बना देते हैं। कोई जिम्मेदार राहुल से पूछेगा कि ऐसा क्यों किया?


अभिताभ को भी लपेट लिया है
अमिताभ की नई फिल्म आई है रण। अभी मैंने देखी तो नहीं लेकिन चर्चा उसकी बहुत है। जिम्मेदार लोगों ने महाभारत में बिग बी को भी खीच लिया। कारण यह बताया कि बिग बी बाल ठाकरे को अपनी फिल्म रण दिखाने उनके घर जा रहे हैं। फिल्म, क्रिकेट, उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज लोगों को मैंने ठाकरे से मिलते देखा है। दरअसल मसला फिल्म दिखाने का नहीं मसला बिग बी के गुजरात का ब्रांड अंबेसडर बनने का है। जिम्मेदार लोगों और उनके प्रायोजकों यह नहीं पच रहा है कि अमिताभ मोदी के राज का में रहें। अमिताभ गुजरात के ब्रांड अंबेसडर बने तो गलत किया उन्हें महाराष्ट्र  का बनना चाहिए था जहां हजारों किसानों ने आत्महत्या की, मेघायल का बनना चाहिए था जहां चार-चार सीएम, गोवा का बनना था जहां विदेश-स्वदेशी कोई भी सुरक्षित नहीं, हरियाणा का बनना था जहां पंचायतें राज करती हैं, कश्मीर का बनना था जहां की सरकार पूर्व आतंकी को पद्श्री दिलाती है। है न जिम्मेदार लोगों? मोदी के जीवन से अगर गोधरा दंगे को निकाल दिया जाए तो उनमें बुराई क्या है। अगर आपातकाल लगाने वाले को, बड़ा पेड़ गिरने पर मची हलचल को सही ठहराने वाले  'भारत रत्न' हैं तो उनके अनुयायी मोदी को कब तक दोषी ठहराएंगे? जनता ने उन्हें माफ किया था तो मोदी को माफ किया है। उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति बनाया और देश में सूचना क्रांति की तो मोदी ने भी गुजरात को नया कलेवर, नया तेवर दिया है।

चलते-चलते
मोदी को छोड़ कर अगर हम कुछ देर के लिए बिहार की बात करें। पांच साल में नीतीश कुमार ने बिहार को आर्थिक विकास के मामले में देश में दूसरे नंबर पर खड़ा कर दिया। आज बिहार में सड़कें हैं। लोग निर्भय होकर चल सकते हैं। अब बिहार जाने से डर नहीं लगता है। और नीतीश ही हैं जिन्होंने ऐसा कानून बनाने की हिम्मत दिखाई जिसमें भ्रष्टचारियों के घर स्कूल बनाने की बात हो। ऐसे नीतीश के कामों को जिम्मेदार लोग क्यों अनदेखा कर रहे हैं? यह मेरा सवाल है? उनसे भी और आपसे भी। गुजरात, गोधरा, कंधमाल जैसी घटनाएं हमारे देश और हमारी एकता पर कलंक हैं। एक गहरा जख्म हैं, जिन्हें कुरेद कर हरा करना हमारे लिए ही नुकसानदेह है। एक निवेदन है जिम्मेदार लोगों से कि वे देश को तोडऩे वाले लोगों का प्रचार-प्रसार करना बंद करें नहीं तो नुकसान देश का होगा।

किस शहर से आए हैं

कहां - कहां से

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