राज और समाज पर खरी आवाज

Website templates

रविवार, 27 सितंबर 2009

भगत सिंह ने कहा था- क्रांति मतलब व्यवस्था में परिवर्तन


क्रांतिकारी न्याय के लिए लड़ते हैं अन्याय के लिए बल प्रयोग नहीं करते है। क्रांतिकारी स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अपनी शारीरिक एवं नैतिक शक्ति दोनों के प्रयोग में विश्वास करता है। इसलिए अब सवाल यह नहीं है कि आप ङ्क्षहसा चाहते है या अङ्क्षहसा? बल्कि सवाल तो यह है कि आप अपने उद्देश्य प्राप्ति के लिए शारीरिक बल सहित नैतिक बल का प्रयोग करना चाहते है या केवल आत्मिक शक्ति का? क्रांति पूंजीवाद, वर्गवाद तथा कुछ लोगों को ही विशेषाधिकार दिलाने वाली प्रणाली का अंत कर देंगी। यह राष्ट्र को अपने पैरों पर खडा करेगी, उससे नवीन राष्ट्र और नये समाज का जन्म होगा। क्रांति से सबसे बड़ी बात तो यह होगी कि वह मजदूर तथा किसानों का राज कायम कर उन सब सामाजिक अवांछित तत्वों को समाप्त कर देगी जो राजनीतिक शक्ति को हथियार मान बैठे है। आतंकवाद क्रांति नहीं है। क्रांति का एक आवश्यक और अवश्यंभावी अंग है। आतंकवाद आतदायी के मन में भय पैदा करता है और पीडि़त जनता में प्रतिशोध की भावना जागृत करके उन्हे शक्ति प्रदान करता है। क्रांति के लिए खूनी संघर्ष अनिवार्य नहीं है और न ही उसमे व्यक्तिगत प्रतिङ्क्षहसा के लिए कोई स्थान है वह बम और पिस्तौल का संप्रदाय नहीं है। क्रांति से हमारा अभिप्राय है- अन्याय पर आधारित मौजूद समाज व्यवस्था में आमूल परिवर्तन। इंकलाब जिंदाबाद

शनिवार, 26 सितंबर 2009

साल में दिन बस 365 हों

आज मैंने जीवन के अनुभव का एक और साल पूरा किया और एक नए साल की शुरूआत की। ढेर सारी शुभकामनाएं मिलीं बड़ों ने आशीर्वाद दिया। कोई खास आयोजन तो नहीं हुआ लेकिन इस बात का एहसास कि 26 सितंबर मेरा जन्मदिन है 25 की रात 12 बजे से ही होने लगा। बनारस भी याद आया। जहां जन्मदिन मनाने का अंदाज ही अलग था। हिंदी विभाग के बगल मैत्री जलपान गृह का केबिन जहां हम सभी साथी जन्मदिन मनाया करते थे। क्लास के सभी 13 लोग वहां पहुंचते। फिर समोसे, कचौरी, रसगुल्ला, गुलाबजामुन, चाय/कोल्डड्रिंक का टोकन लेते। फिर राउंड टेबल पर बैठकर इन सब का इंतजार करते। जैसे ही सब तैयार होता बहादुर आकर बताते। वैसे वहां सेल्फ सर्विस थी लेकिन बहादुर मुझे कॉमरेड समझकर हमारे गु्रप की मदद करते। इसके बाद शुरू होता खाने का सिलसिला। किसी को समोसा पसंद तो किसी को मिठाई सब अपनी पसंद की चीज दूसरे से समझौते के तहत लेते अगर नहीं मिलता तो शालीन छीना-झपटी तक हो जाती। खैर परिणाम दोनो पक्षों के लिए सकारात्मक ही रहता। इसके बाद कुछ कविताएं, चुटकुले, हंसी-मजाक और फिर सब अगले आयोजन के इंतजार में चले जाते। ऐसा होता था आयोजन।

खैर यह बात पुरानी हो चुकी। इसके बाद गंगा में चार साल से ज्यादा पानी बह चुका है। लेकिन बनारसी सहपाठियों के फोन आने से यादें ताजा हो गईं। इसके अलावा कई दोस्तों के फोन आए। एसएमएस आए। मेल आए, चैटिंग हुई। ऑरकुट पर स्क्रैब आए हर साल की तरह। रात को एक पुराने दोस्त के फोन के साथ यह सिलसिला बंद हुआ। इस बार मुझे मिला सबसे खास एसएमएस मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ, जो मुझे मेरे छोटे भाई दीपू ने भेजा है-


भाई आपको जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं। मैं यह नहीं कहूंगा कि आने वाले साल में आपके लिए 50,000 दिन हों। हां, मैं भगवान से यह मनाऊंगा कि आपके आने वाले 365 दिन बीते 365 दिनों से बेहतर हों। जीवन के संघर्ष में सफलता आपका वरण करे और आपका जीवन सार्थक हो।- आमीन-सुम्मामीन

मंगलवार, 22 सितंबर 2009

शक्ति साधना-4-9


कूष्माण्डेति चतुर्थतकम्
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।। मां दुर्गाजी के चौथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। अपनी मंद, हल्की हंसी से अंड यानी ब्रह्मड को उत्पन्न करने के कारण माता को यह नाम दिया गया है। इनकी आठ भुजाएं हैं। आठों हाथों में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत कलश, चक्र, गदा तथा जपमाला है। इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। इस कारण कूष्माण्डा कही जाती हैं।
पञ्चमं स्कन्दमातेति
सिंहासनागता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवि स्कन्दमात यशस्विनी।। मां दुर्गा के पांचवें रूप की पूजा मां स्कन्दमाता के रूप में की जाती है। कुमार कार्तिकेय (भगवान स्कन्द) की माता होने के कारण देवि को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। सिंह वाहिनी चतुर्भुजी मां की गोद में भगवान स्कन्द बैठे रहते हैं।
षष्ठं कात्यायनीति च
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शर्दूलवरवाहना। कात्यानी शुभं दद्यादेवी दानवघातिनी।। मां दुर्गा के छठें रूपा की पूजा मां कात्यायनी के रूप में होती है। महर्षि कात्य की पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण मां कात्यायनी नाम से जानी गर्ईं। कालान्तर में पृथ्वी पर महिषसुर का अत्याचार बढऩे पर ब्रह्मा-विष्णु-महेश के अंश से एक देवी अवतरित हुर्ईं। इनकी प्रथम पूजा महर्षि कात्यायन ने की। व्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवि मां अमोघ फलदायिनी हैं। चतुर्भुज मां केहरि वाहन पर विराजित हैं।
सप्तम् कालरात्रीति
एकवेणि जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्याक्तशरीरिणी। वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भङ्करी।। मां दुर्गा का सातवां रूप कालरात्रि है। इनके शरीर का रंग घेन अन्धकार की तरह काला है। सिर के केश बिखरे हैं और गले में विद्युत सी चमकने वाली माला है। त्रिनेत्री मां के श्वास-प्रश्वास से भयङ्कïर ज्वालाएं निकलती हैं। गर्दभ वाहिनी मां का रूप भले अत्यन्त भयानक हो लेकिन ये सदैव शुभ फल देती हैं। इसी कारण से इनका एक नाम शुभङ्करी भी है।।
महागौरीति चाष्टमम्
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यन्महादेवप्रमोददा।। मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। श्वेतवर्णा मां के समस्त वस्त्र श्वेत हैं और इनका वाहन वृषभ है। त्रिशूल, डमरू और कमंडलधारी मां ने शिव को वर रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की। गोस्वामी तुलसीदासजी के अनुसार इन्होंने संकल्प लिया था- जन्म कोटि लगि रगर हमारी, बरऊं संभु न त रहउँ कुँआरी।। इनकी उपासना से भक्त के सभी कल्मष धुल जाते हैं।
नवमं सिद्धिदात्री
सिद्धगन्धर्वयक्षद्यैरसुरैरमरैरपि। सिसेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।। मां दुर्गा का नौवां रूप सिद्धिदात्री का है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मार्कण्डेयपुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया।

एक छोटा सा एसएमएस

कल मेरे छोटे भाई दीपू का छोटा सा एसएमएस आया। उसे अविकल प्रस्तुत कर रहा हूं। इसे पढ़कर बीते दिन तो याद आए ही, यह भी लगा कि दीपू बड़ा हो रहा है।
एक दिन जिंदगी ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएगी
दोस्ती तो सिर्फ यादों में रह जाएगी।
हर कप कॉफी याद दोस्तों की दिलाएगी
हंसते-हंसते आंखें नम हो जाएंगी।
पैसा तो बहुत होगा...मगर,
उन्हें खर्चनें की वजह खत्म हो जाएगी।
ऑफिस के चेंबर में क्लासरूम नजर आएगी,पर
लाख चाहने के बाद भी यहां प्रॉक्सी सी नहीं लग पाएगी।
जी ले! खुल के इस पल को मेरे दोस्त
क्योंकि जिंदगी इन पलों को फिर नहीं दोहराएगी.....

रविवार, 20 सितंबर 2009

शक्ति साधना-3

तृतीयं चंद्रघण्टेति


पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यचंद्रघण्टेति विश्रुता।।
मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि के तीसरे दिन शक्ति के चंद्रघंटा स्वरूप की उपासना की जाती है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। शेर पर विराजित मां के दस हाथों में त्रिशूल, गदा, खड्ग आदि शस्त्र-अस्त्र हैं। युद्ध की मुद्रा में उद्यत रहने वाली चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं और समस्त पाप व बाधाएं नष्टï हो जाती हैं।


शक्ति साधना-2

द्वितीयं ब्रह्मचारिणी


दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
मां दुर्गा की नौ शक्तियों में दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या और ब्रह्मचारिणी अर्थात् तप की चारिणी-'तप का आचरण' करने वाली। नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करते हुए भक्तों को आचरण की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शुद्ध और संयमित आचरण के साथ ही तप, त्याग, वैराग्य और सदाचार का मार्ग प्रशस्त होता है। संयमता व्यवहार, दृष्टि, वाणी व आचरण में रहनी चाहिए। इससे व्यक्ति लक्ष्य को आसानी से प्राप्त करता है। वहीं गुरु और माता-पिता की तपस्या (उपासना) से गुणों की वृद्धि श्रेष्ठ समाज निर्माण में सहायक होती है। ब्रह्मïचारिणी माता के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमण्डल रहता है।

शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

शक्ति साधना-1

प्रथमं शैलपुत्री



वंदे वांछितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
नवरात्रि में मां दुर्गा के पहले रूप की पूजा मां शैलपुत्री के रूप में की जाती है। पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। बैल पर विराजित माता दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल धारण किए हैं। हिमालय शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक है, इसलिए इस दिन अपने स्थायित्व व शक्तिमान होने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। वहीं बिना निमंत्रण कहीं भी जाने का भाव का त्याग करना जरूरी है। पूर्व जन्म में पिता प्रजापति दक्ष के नहीं बुलाने पर भी सती यज्ञ में सम्मिलित हुई और तिरस्कार से व्यथित सती ने अपने शरीर को भस्म कर दिया।
शक्ति साधना के पर्व नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।।

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

कांग्रेस की क्लास, चीन की कुदृष्टि, देश की इकॉनमी और गांधी-आजाद

विधानसभा उपचुनाव परिणाम की बात छोड़ दें तो राजनीति में जो खबर सबसे ज्यादा चर्चा में है और जिस खबर को सबसे ज्यादा चर्चा दी जा रही है वह है सोनिया गांधी का इकॉनमी क्लास में सफर करना। कांग्रेस अध्यक्ष ने सोमवार को इकॉनमी क्लास में यात्रा की तो मंगलवार को उनके साहबजादे ने शताब्दी एक्सप्रेस में। कहीं ब्रेकिंग न्यूज चली और कहीं फोटो के साथ खबर। इसके पहले खबर आई थी कि मैडम ने केंद्रीय मंत्रियों को किफायत की नसीहत क्या दी, मंत्री उलटा बोलने लगे। खैर पहल की सरकार के खजांची प्रणब दा ने उन्होंने सामान्य यात्रियों के साथ विमान में यात्रा की। दूसरी ओर, महीनों से देश के सबसे महंगे होटलों के सबसे महंगे कमरों (सुइट) में रह रहे विदेशमंत्री और उनके जूनियर भी यहां से निकलकर सरकारी अतिथि गृहों में पहुंच गए। वैसे दोनों नेताओं ने तो कहा कि उनका किराया उनकी जेब से गया लेकिन इस दौरान इन होटलों में हुई मीटिंग का खर्च सरकार के खाते से लिया गया। जब रायता ढुल गया तो सरकार लगी उसे साफ करने की कोशिश में। खैर लगी रहे सरकार......

कांग्रेस के इस दांव से भाजपा के पेट में दर्द तो होना ही था, सो हुआ भी। पार्टी के प्रवक्ता कहने लगे कि यह ढोंग है। इतना तो चलता है लेकिन वरिष्ठ राजनीतिक विचारक ने एक चैनल पर कांग्रेस की इस पूरी कवायद को पाखंड बताया। पाखंड ही तो है। जिनकी एक यात्रा में लाखों का पेट्रोल दर्जनों गाडिय़ों के लिए चाहिए। सुरक्षा अभेद कवर, जिसका खर्च सरकार की जेब से जा रहा है और ऐसी ही तमाम सुविधाएं मिल रही हैं तो क्या मतलब चाहे इकॉनमी क्लास हो या चेयरकार? कांग्रेस ही नहीं अन्य दलों के सभी पाखंडी नेताओं से कहना चाहता हूं कि अगर कुछ करना है तो निकलिए लोकल ट्रेन या दिल्ली की बसों में। या फिर गोरखपुर से मुंबई, पटना से मुंबई, हाजीपुर से असम वाली ट्रेन के स्लीपर और सामन्य कोच में। तब समझ में आएगा कि कैसे रह रही है जनता और कैसे चल रही है भारत की जनता?

होना और दिखाना
बहुत साल पहले एक कविता सुनी थी। उसमें गांधीजी और चंद्रशेखर आजाद की तुलना करते हुए कवि ने जो कहा था उसका भावार्थ यह है कि गांधी जी के बंदी घर भी महलों और भवनों में होते थे, जबकि आजाद जंगलों में मौत के साए में सोते थे। बकरी का दूध ही सही गांधी जी कुछ तो पीते थे, जबकि आजाद को भुने चने भी कभी-कभी किस्मत से मिलते थे। बुजुर्ग गांधी ने चौथेपन में आधी धोती पहनना शुरू किया जबकि आजाद भरी जवानी में एक लुंगी में रहते थे और जो सबसे आखिरी बात उन्होंने कही वो यह कि गांधी जी हमेशा झुकते रहे, पर आज गरजता रहा। गांधी जी गुलाम से आजाद हुए आजाद सदा आजाद रहा। किसी ने कहा था कि गांधीजी को जैसा वो दिखते थे वैसा दिखाने में कांग्रेस बहुत खर्च करना पड़ता था।

यहां मेरे यह कहने का निहितार्थ यह था कि राहुल-सोनिया या ऐसे ही अन्य राजनेता अगर सामान्य कोच में भी बैठेंगे तो वह एसी जैसा होगा, जबकि आम आदमी को एसी में भी वह सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। दूसरा यह कि इस दिखावे में जो खर्च हो रहा है और सुरक्षा के साथ खिलावड़ किया जा रहा है वह ठीक नहीं है। खैर हरि अनंत, हरि कथा अनंता.....

चलते-चलते
इन दिनों डै्रगन फिर भारत की ओर मुंह बाए खड़ा है। खड़ा तो वह पहले से ही था लेकिन अब दिखने लगा है लेकिन खास बात यह कि हमारी सरकार मौन है। यह मौन वैसा ही जैसा 1962 में था, जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ा। चीनी चीटियां आए दिन भारत में घुसकर बिल खोद रही हैं लेकिन सरकार किफायत की कवायद के दिखावे में लगी है। खास बात है कि चीन इस बार भारत को तीन ओर से घेर रहा है। पाकिस्तान तो उसकी गोद में बैठा ही है, नेपाल भी उसके सामने घुटने टेक चुका है। नेपाल की राजशाही कम से कम भारत के लिए अपेक्षाकृत ठीक थी। पाक रॉकेट पर रॉकेट दाग रहा है। नेपाल ऊटपटांग बयान दे रहा है लेकिन हमारे विदेशमंत्री इकॉनमी क्लास में यात्रा करने की घोषणा कर रहे हैं और उनके जूनियर बांगाली छोले भटूरे खाने में मशगूल हैं। कहने कहा लब्बो-लुबाब सिर्फ इतना है कि अगर सरकार अब भी नहीं चेती तो कहीं देर न हो जाए.......?

रविवार, 13 सितंबर 2009

हिंदी




बिहरो बिहारी की बिहार वाटिका में चाहे
सूर की कुटी में अड आसन जमाइए।

केशव के कुंज में किलोलि केलि कीजिए,कि 
तुलसी के मानस में डुबकी लगाइए।

देव की दरी में दूर दिव्यता निहारिए
या भूषण की सेना के सिपाही बन जाइए।

अन्य भाषा भाषियों मिलेगा मनमान सुख, 
हिंदी के हिंडोले में जरा सा बैठ जाइए।।

जै हिन्दी, जै हिन्दुस्तान 


(ये पंकि्तयां हिंदी की सुंदरता और समृद्धता बताती हैं। आप को पता हो तो जरूर बताएं किसकी लिखी हैं और पूरा छंद कहां मिलेगा.....?उत्तरापेक्षी

क्षणभर सोचा

एक शाम तेरे नाम 

कट गई लंबी जुदाई
मिलन की बेला आई
चेहरे पर हंसी रहे
घडिय़ां थमीं रहें

सिलसिला हो बात का
स्नेह के जज्बात का
एहसास हो तेरे साथ का

न दूर तक कहीं कोई
न आसमां, न जमी कहीं
न किसी की हो खबर
न किसी को हो खबर
बेखबर, सब बेखबर
तुम रहो और हम रहें
न तुम रहो, न हम रहें.

शनिवार, 12 सितंबर 2009

जनता महा ज्ञानी मैं जानी

आजकल देश की राजनीति में ज्यादा हलचल नहीं है। दो राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन तैयारी अभी अंदरखाने ही चल रही है। हरियाणा में कांग्रेस ओवरकॉन्फीडेंस में है तो महाराष्ट्र में उसे हालिया लोकसभा चुनाव परिणाम दोहराने की आस है। खैर यह इंडिया की जनता है। जैसे कोस-कोस पर पानी बदले और चार कोस पर बानी वैसे ही हर चुनाव के साथ जनता का मन भी बदलता रहता है। इतिहास इसका गवाह है। वैसे भी महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ डाली है। अब लगता है जनता महंगाई के साथ जीना सीख गई है। तभी तो न कोई धरना, न प्रदर्शन न मोर्चा। ये तो जनता जाने लेकिन हम जो जानते हैं वो यह कि जनता महा ज्ञानी मैं जानी मैं जानी। इधर सरकार किफायत पर जुट गई है। एक अखबार ने दो मंत्रियों के फाइव स्टार होटल में रहने की खबर क्या ब्रेक की सरकार हिल गई। होटल भी क्या? जहां एक कमरे का एक दिन का किराया एक लाख रुपए। आम जनता यह नहीं समझ पाई कि आखिर एक लाख रात वाले कमरे में हमारे नेता जी करते क्या होंगे? मैडम ने बोला कि नेता किफायत बरतें। कैबिनेट में बात आई तो कुछ ने एतराज भी जता दिया। इधर, सरकार के खजांची प्रणब दा भी कुछ ऐसा ही ज्ञान दे रहे हैं। ऐसे में राहुल बाबा कैसे चुप रहें। जहां थे वहीं से खर्च कम करने का ज्ञान दे दिया। अब कोई बात हो तो बाबा का बोलना जरूरी है, सो बोल दिया। देखना है कि होता क्या है? लेकिन एक बात पर कांग्रेस बोलने से कन्नी काट रहे हैं। वो यह कि आंध्र का अगला सीएम कौन होगा? कांग्रेस की परंपरा पर चलें तो जगनमोहन रेड्डी को बनना चाहिए, लेकिन आलाकमान अभी कुछ कह नहीं रहा। रुकावट उनके अनुभव को लेकर पैदा की जा रही है। खैर अनुभव तो कांग्रेस में मायने रखता नहीं। यहां तो परिवार सबसे ऊपर है। कोई बताएगा क्यों? यही सबसे बड़ी काबिलियत,जो जगन के पास है।
चलते-चलते
आजकल गुजरात फर्जी मुठभेड़ को लेकर खूब हो-हल्ला है। अगर मुठभेड़ फर्जी थी तो गलत था। अन्याय किसी के साथ हो गलत है। सबसे ज्यादा हल्ला कांग्रेस और वामपंथी भाई मचा रहे हैं। वही कांग्रेस जिसकी सरकार कोर्ट में यह हलफनामा देती है कि इशरत का आतंकियों से रिश्ता था। केंद्रीय गृहसचिव कहते हैं, इशरत का आतंकियों से संबंध तो था लेकिन मुठभेड़ गलत। खैर गलत सही बताने का काम तो सरकार और कानून का है। अपन तो बस इतना याद दिला रहे हैं कि मणिपुर में हाल ही में दो फर्जी मुठभेड़ के मामले सामने आए हैं। जम्मू-कश्मीर में ऐसे मसले आए दिन होते रहते हैं। और वामपंथी भाइयों क्या सिंगूर, नंदीग्राम भूल गए क्या? अपना काम तो था याद कराना सो करा दिया, बाकी पहले ही कह चुका हूं- जनता महा ज्ञानी मैं जानी।

किस शहर से आए हैं

कहां - कहां से

Related Posts with Thumbnails